Monday, May 16, 2005

कुछ शायरी हो जाये ?

दुनिया से डर कर मैने जीना छोड दिया है,
लेहेरॊ को चीर के आगे बध रहा हूं,
अब ज़िन्दगी मॆ मज़ा आ रहा है,
अगली बाज़ी का इन्तज़ार कर रहा हूं

No comments: